श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.50.28 
मनुष्येषु मनुष्येन्द्र न दृष्टो न च मे श्रुत:।
भवतो वा गुणैर्युक्त: पृथिव्यां पुरुष: क्वचित् ॥ २८॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! इस पृथ्वी पर मैंने न तो किसी ऐसे मनुष्य को देखा है और न सुना है, जिसमें तुम्हारे समान गुण हों॥ 28॥
 
'Narendra! I have neither seen nor heard of any human being on this earth who has qualities like yours.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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