श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.50.16 
सुसूक्ष्मोऽपि तु देहे वै शल्यो जनयते रुजम्।
किं पुन: शरसंघातैश्चित्तस्य तव पार्थिव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजन्! यदि आपके शरीर में छोटे-से-छोटा काँटा भी चुभ जाए, तो वह अत्यन्त पीड़ा देता है। फिर बाणों के समूह से बिंधे हुए आपके शरीर की पीड़ा के विषय में क्या कहा जा सकता है?॥16॥
 
‘King! If even the tiniest of thorns pierces your body, it causes immense pain. Then what can be said about the pain of your body which has been pierced by a group of arrows?॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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