श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.50.13 
कच्चिज्ज्ञानानि सर्वाणि प्रसन्नानि यथा पुरा।
कच्चिन्न व्याकुला चैव बुद्धिस्ते वदतां वर॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे वक्ताओं में श्रेष्ठ भीष्मजी! क्या आपकी समस्त इन्द्रियाँ पहले की भाँति प्रसन्न हैं? क्या आपकी बुद्धि विचलित नहीं हुई है?॥13॥
 
'O best of speakers, Bhishmaji! Are all your senses happy as before? Is your intellect not disturbed?॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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