श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 50: श्रीकृष्णद्वारा भीष्मजीके गुण-प्रभावका सविस्तर वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.50.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो रामस्य तत् कर्मं श्रुत्वा राजा युधिष्ठिर:।
विस्मयं परमं गत्वा प्रत्युवाच जनार्दनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- हे राजन! परशुरामजी के असाधारण कार्य को सुनकर राजा युधिष्ठिर को बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से कहा-॥1॥
 
Vaishampayana says- O King! King Yudhishthira was very surprised to hear about the extraordinary act of Parashurama. He said to Lord Krishna-॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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