श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 5: कर्णके बल और पराक्रमका वर्णन, उसके द्वारा जरासंधकी पराजय और जरासंधका कर्णको अंगदेशमें मालिनी नगरीका राज्य प्रदान करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.5.15 
एवं शप्तस्तव भ्राता बहुभिश्चापि वञ्चित:।
न शोच्य: पुरुषव्याघ्र युद्धेन निधनं गत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे नरसिंह युधिष्ठिर! इस प्रकार तुम्हारा भाई कर्ण न केवल शापित हुआ, अपितु अनेक लोगों द्वारा छला भी गया। तथापि वह युद्ध में मारा गया, अतः उसके लिए शोक करने योग्य कुछ नहीं है।॥15॥
 
O lion of men, Yudhishthira! In this way, your brother Karna was not only cursed, but he was also deceived by many people. However, he was killed in the war, so he is not worth mourning for. ॥ 15॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि कर्णवीर्यकथनं नाम पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कर्णके पराक्रमका कथन नामक पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)