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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा
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श्लोक 72
श्लोक
12.49.72
तां दृष्ट्वा द्रवतीं तत्र संत्रासात् स महामना:।
ऊरुणा धारयामास कश्यप: पृथिवीं तत:॥ ७२॥
अनुवाद
जब महाहृदयी कश्यप ने पृथ्वी को भयभीत होकर रसातल की ओर भागते देखा, तो उन्होंने अपनी जांघों का सहारा देकर उसे रोक दिया।
When the great-hearted Kasyapa saw the Earth running in fear towards the abyss, he stopped it by supporting it with his thighs.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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