श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 49: परशुरामजीके उपाख्यानमें क्षत्रियोंके विनाश और पुन: उत्पन्न होनेकी कथा  »  श्लोक 70-71
 
 
श्लोक  12.49.70-71 
तत: कालेन पृथिवी पीडॺमाना दुरात्मभि:॥ ७०॥
विपर्ययेण तेनाशु प्रविवेश रसातलम्।
अरक्ष्यमाणा विधिवत् क्षत्रियैर्धर्मरक्षिभि:॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
समय बीतने पर दुष्ट मनुष्य अपने अत्याचारों से पृथ्वी को कष्ट देने लगे। इस उत्पात के कारण पृथ्वी शीघ्र ही रसातल में जाने लगी; क्योंकि उस समय धर्मरक्षक क्षत्रियों द्वारा पृथ्वी की उचित रीति से रक्षा नहीं की जा रही थी।
 
With the passage of time, evil men started tormenting the earth with their atrocities. Due to this upheaval, the earth soon started entering the abyss; because at that time the earth was not being protected in a proper manner by the Dharma-protecting Kshatriyas. 70-71.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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