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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 48: परशुरामजीद्वारा होनेवाले क्षत्रियसंहारके विषयमें राजा युधिष्ठिरका प्रश्न
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श्लोक 11
श्लोक
12.48.11
क्षत्रबीजं यथा दग्धं रामेण यदुपुङ्गव।
कथं भूय: समुत्पत्ति: क्षत्रस्यामितविक्रम॥ ११॥
अनुवाद
हे पराक्रमी यदुनाथ! जब परशुरामजी ने क्षत्रियों का बीज ही जला दिया, तब क्षत्रिय वंश कैसे उत्पन्न हुआ?॥11॥
O mighty Yadunath! When Parashurama burnt the very seed of the Kshatriyas, then how did the Kshatriya race come into existence?॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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