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mahabharat 12.47.d30: भीष्मजी ने जीवन का फल प्राप्त करके अपने सामने उन्हीं श्रीहरि को देखते हुए प्राण त्याग दिए, जिन्हें योगीजन प्राण त्यागते समय ध्यानपूर्वक अपने हृदय में स्थापित करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.47.d30 
(यं योगिन: प्राप्तवियोगकाले
यत्नेन चित्ते विनिवेशयन्ति।
स तं पुरस्ताद्धरिमीक्षमाण:
प्राणाञ्जहौ प्राप्तफलो हि भीष्म:॥ )
 
 
अनुवाद
भीष्मजी ने जीवन का फल प्राप्त करके अपने सामने उन्हीं श्रीहरि को देखते हुए प्राण त्याग दिए, जिन्हें योगीजन प्राण त्यागते समय ध्यानपूर्वक अपने हृदय में स्थापित करते हैं।
 
Bhishmaji, having attained the fruit of life, gave up his life while seeing in front of him the same Shri Hari, whom the Yogis carefully establish in their hearts at the time of giving up their lives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)