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mahabharat 12.47.d1-3: राजा! जब दक्षिणायन समाप्त हो गया और सूर्य उत्तरायण में आ गया, तब माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्याह्न के समय भीष्म ध्यान में मग्न हो गए और उन्होंने अपना मन भगवान् में लगा दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक d1-3
 
 
श्लोक  12.47.d1-3 
(शुक्लपक्षस्य चाष्टम्यां माघमासस्य पार्थिव।
प्राजापत्ये च नक्षत्रे मध्यं प्राप्ते दिवाकरे॥ )
निवृत्तमात्रे त्वयन उत्तरे वै दिवाकरे।
समावेशयदात्मानमात्मन्येव समाहित:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजा! जब दक्षिणायन समाप्त हो गया और सूर्य उत्तरायण में आ गया, तब माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्याह्न के समय भीष्म ध्यान में मग्न हो गए और उन्होंने अपना मन भगवान् में लगा दिया।
 
King! When the Dakshinayan ended and the Sun entered the Uttarayan, then on the eighth day of the bright half of the month of Magha, in the Rohini constellation at noon, Bhishma became engrossed in meditation and fixed his mind on the Supreme Being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)