Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.47.88: मैं तीनों लोकों में आपके दिव्य जन्म का रहस्य नहीं जान सकता; सत्य की दृष्टि से मैं आपके सनातन स्वरूप को ही लक्ष्य करता हूँ ॥ 88॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  12.47.88 
न हि पश्यामि ते भावं दिव्यं हि त्रिषु वर्त्मसु।
त्वां तु पश्यामि तत्त्वेन यत् ते रूपं सनातनम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
मैं तीनों लोकों में आपके दिव्य जन्म का रहस्य नहीं जान सकता; सत्य की दृष्टि से मैं आपके सनातन स्वरूप को ही लक्ष्य करता हूँ ॥ 88॥
 
I cannot fathom the secret of Your divine birth in the three worlds; from the perspective of truth I aim at Your eternal form. ॥ 88॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)