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mahabharat 12.47.82: जिनके मस्तक पर अर्धचन्द्राकार मुकुट और शरीर पर सर्प का जनेऊ सुशोभित है, जो हाथों में पिनाक और त्रिशूल धारण करते हैं, उन भयंकर रूप वाले भगवान शंकर को नमस्कार है॥82॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  12.47.82 
चन्द्रार्धकृतशीर्षाय व्यालयज्ञोपवीतिने।
पिनाकशूलहस्ताय तस्मा उग्रात्मने नम:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
जिनके मस्तक पर अर्धचन्द्राकार मुकुट और शरीर पर सर्प का जनेऊ सुशोभित है, जो हाथों में पिनाक और त्रिशूल धारण करते हैं, उन भयंकर रूप वाले भगवान शंकर को नमस्कार है॥82॥
 
Salutations to Lord Shankar in the fierce form, on whose head is adorned the crown of the half-moon and on his body the sacred thread of the serpent, who holds the pinaka and the trident in his hands. 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)