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mahabharat 12.47.78: अन्नमय्या आदि पाँच कोशों में स्थित अन्तर्यामी आत्मा का ज्ञान प्राप्त करके हम उस ज्ञानस्वरूप परब्रह्म को नमस्कार करते हैं, जिसे विद्वान पुरुष शुद्ध बुद्धि से प्राप्त करते हैं ॥78॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  12.47.78 
आत्मज्ञानमिदं ज्ञानं ज्ञात्वा पञ्चस्ववस्थितम्।
यं ज्ञानेनाभिगच्छन्ति तस्मै ज्ञानात्मने नम:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
अन्नमय्या आदि पाँच कोशों में स्थित अन्तर्यामी आत्मा का ज्ञान प्राप्त करके हम उस ज्ञानस्वरूप परब्रह्म को नमस्कार करते हैं, जिसे विद्वान पुरुष शुद्ध बुद्धि से प्राप्त करते हैं ॥78॥
 
After having the knowledge of the innermost soul situated in the five sheaths like Annamayya, we pay our respects to the Supreme Brahma in the form of knowledge which the learned men attain through pure understanding. 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)