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श्लोक 12.47.76  |
रसातलगत: श्रीमाननन्तो भगवान् विभु:।
जगद् धारयते कृत्स्नं तस्मै वीर्यात्मने नम:॥ ७६॥ |
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| अनुवाद |
| जो श्री अनन्त नामक शेषनाग के रूप में रसातल में निवास करते हैं और सम्पूर्ण जगत् को अपने सिर पर धारण करते हैं, उन वीर्यस्वरूप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ॥76॥ |
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| I salute the Supreme Lord in the form of semen who resides in the abyss in the form of Sheshnag named Shri Anant and holds the entire world on His head. 76॥ |
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