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mahabharat 12.47.74: जिनका नरसिंह रूप दैत्यराज हिरण्यकशिपु का वध करने वाला था, जिनके नेत्र और कन्धे के बाल उस समय पीले थे, जिनके आयुध बड़ी-बड़ी दाढ़ी और नख थे, उन अभिमानस्वरूप भगवान नरसिंह को नमस्कार है ॥ 74॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  12.47.74 
पिङ्गेक्षणसटं यस्य रूपं दंष्ट्रानखायुधम्।
दानवेन्द्रान्तकरणं तस्मै दृप्तात्मने नम:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
जिनका नरसिंह रूप दैत्यराज हिरण्यकशिपु का वध करने वाला था, जिनके नेत्र और कन्धे के बाल उस समय पीले थे, जिनके आयुध बड़ी-बड़ी दाढ़ी और नख थे, उन अभिमानस्वरूप भगवान नरसिंह को नमस्कार है ॥ 74॥
 
Salutations to Lord Narasimha, who is embodiment of pride, whose Narasimha form was about to kill the demon king Hiranyakashipu, whose eyes and shoulder hair were yellow at that time, whose weapons were large beard and nails. ॥ 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)