Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.47.53: जो इस स्थूल जगत् में अव्यक्त रूप से निवास करते हैं, जिनका सार महर्षियों द्वारा शोधित किया जाता है, जो क्षेत्रज्ञ के रूप में समस्त लोकों में निवास करते हैं, मैं उन क्षेत्रस्वरूप परमेश्वर को नमस्कार करता हूँ ॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  12.47.53 
यं च व्यक्तस्थमव्यक्तं विचिन्वन्ति महर्षय:।
क्षेत्रे क्षेत्रज्ञमासीनं तस्मै क्षेत्रात्मने नम:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जो इस स्थूल जगत् में अव्यक्त रूप से निवास करते हैं, जिनका सार महर्षियों द्वारा शोधित किया जाता है, जो क्षेत्रज्ञ के रूप में समस्त लोकों में निवास करते हैं, मैं उन क्षेत्रस्वरूप परमेश्वर को नमस्कार करता हूँ ॥ 53॥
 
He who resides in the gross world in an unmanifested form, whose essence is being researched by great sages, who resides in all regions as the knower of the field, I bow to that Supreme Being in the form of the field. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)