Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.47.46: जो प्रजापति मुनियों के उस यज्ञ में, जो एक हजार वर्ष में पूर्ण होता है, स्वर्ण पंख वाले पक्षी के रूप में प्रकट हुए थे, उन हंस रूपी परमेश्वर को नमस्कार है ॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.47.46 
य: सहस्रसमे सत्रे जज्ञे विश्वसृजामृषि:।
हिरण्यपक्ष: शकुनिस्तस्मै हंसात्मने नम:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
जो प्रजापति मुनियों के उस यज्ञ में, जो एक हजार वर्ष में पूर्ण होता है, स्वर्ण पंख वाले पक्षी के रूप में प्रकट हुए थे, उन हंस रूपी परमेश्वर को नमस्कार है ॥ 46॥
 
Salutations to the Supreme Lord in the form of a swan who appeared as a bird with golden wings in the sacrifice of the sages of Prajapatis which takes a thousand years to complete. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)