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mahabharat 12.47.28: भगवान वासुदेव को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन तपस्या की जाती है क्योंकि वे सभी के हृदय में निवास करते हैं। वे सबकी आत्मा हैं, सब जानते हैं, सर्वव्यापी हैं और सबके रचयिता हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.47.28 
यस्मिन् नित्यं तपस्तप्तं यदङ्गेष्वनुतिष्ठति।
सर्वात्मा सर्ववित् सर्व: सर्वज्ञ: सर्वभावन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भगवान वासुदेव को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन तपस्या की जाती है क्योंकि वे सभी के हृदय में निवास करते हैं। वे सबकी आत्मा हैं, सब जानते हैं, सर्वव्यापी हैं और सबके रचयिता हैं।
 
Daily penance is performed to please Lord Vasudeva because he resides in the hearts of all. He is the soul of all, knows all, is omnipresent, and is the creator of all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)