श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  12.47.23-24h 
हरिं सहस्रशिरसं सहस्रचरणेक्षणम्॥ २३॥
सहस्रबाहुमुकुटं सहस्रवदनोज्ज्वलम्।
 
 
अनुवाद
उन श्री हरि के हज़ार सिर, हज़ार पैर और हज़ार नेत्र हैं। वे हज़ार भुजाओं, हज़ार मुकुटों और हज़ार मुखों से चमकते हैं। 23 1/2।
 
That Shri Hari has a thousand heads, a thousand feet and a thousand eyes. He shines with a thousand arms, a thousand crowns and a thousand faces. 23 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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