श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  12.47.20-21h 
देवदानवगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगा:॥ २०॥
यं न जानन्ति को ह्येष कुतो वा भगवानिति।
 
 
अनुवाद
देवता, दानव, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस और नाग भी नहीं जानते कि यह परमेश्वर कौन है और कहाँ से आया है॥20 1/2॥
 
Even the gods, demons, Gandharvas, Yakshas, ​​Rakshasas and serpents do not know who this Supreme Lord is and where has he come from. ॥ 20 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd