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mahabharat 12.47.104: वे श्रेष्ठ ब्राह्मण और महामुनि भगवान केशव की स्तुति करते हुए धीरे-धीरे बार-बार भीष्मजी की स्तुति करने लगे ॥104॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  12.47.104 
ते स्तुवन्तश्च विप्राग् या: केशवं पुरुषोत्तमम्।
भीष्मं च शनकै: सर्वे प्रशशंसु: पुन: पुन:॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
वे श्रेष्ठ ब्राह्मण और महामुनि भगवान केशव की स्तुति करते हुए धीरे-धीरे बार-बार भीष्मजी की स्तुति करने लगे ॥104॥
 
While praising Lord Keshav, the great Brahmin and the great sage, he gradually started praising Bhishmaji again and again. 104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)