श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  12.47.102 
अभिगम्य तु योगेन भक्तिं भीष्मस्य माधव:।
त्रैलोक्यदर्शनं ज्ञानं दिव्यं दत्त्वा ययौ हरि:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी की भक्ति को उनके योगबल से जानकर भगवान् भी उनके पास गए और उन्हें तीनों लोकों का ज्ञान कराने वाला दिव्य ज्ञान देकर लौट आए॥102॥
 
Knowing about Bhishma's devotion through his yogic powers, the Lord too went to him and returned after imparting him the divine knowledge which made him understand the matters of the three worlds.॥ 102॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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