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mahabharat 12.44.10: दुर्मर्षण का महल दु:शासन के भवन से भी अधिक सुन्दर था। वह सोने और रत्नों से सुसज्जित था; अतः वह कुबेर के राजमहल के समान चमक रहा था।   |   mahabharat अध्याय 12.44: महाराज युधिष्ठिरके दिये हुए विभिन्न भवनोंमें भीमसेन आदि सब भाइयोंका प्रवेश और विश्राम   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.44.10 
दुर्मर्षणस्य भवनं दु:शासनगृहाद् वरम्।
कुबेरभवनप्रख्यं मणिहेमविभूषितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
दुर्मर्षण का महल दु:शासन के भवन से भी अधिक सुन्दर था। वह सोने और रत्नों से सुसज्जित था; अतः वह कुबेर के राजमहल के समान चमक रहा था।
 
Durmarshan's palace was even more beautiful than Dushasan's house. It was decorated with gold and gems; hence it shone like Kubera's royal palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)