श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 42: राजा युधिष्ठिर तथा धृतराष्ट्रका युद्धमें मारे गये सगे-सम्बन्धियों तथा अन्य राजाओंके लिये श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  12.42.5-6h 
ब्राह्मणानां सहस्राणि पृथगेकैकमुद्दिशन्॥ ५॥
धनै रत्नैश्च गोभिश्च वस्त्रैश्च समतर्पयत्।
 
 
अनुवाद
उन्होंने हजारों ब्राह्मणों को धन, रत्न, गौएँ और वस्त्र देकर उन्हें संतुष्ट किया। ॥5 1/2॥
 
He satisfied thousands of brahmins by giving them money, gems, cows and clothes separately for each one of them. ॥ 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)