श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 42: राजा युधिष्ठिर तथा धृतराष्ट्रका युद्धमें मारे गये सगे-सम्बन्धियों तथा अन्य राजाओंके लिये श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 3-5h
 
 
श्लोक  12.42.3-5h 
युधिष्ठिरस्तु द्रोणस्य कर्णस्य च महात्मन:॥ ३॥
धृष्टद्युम्नाभिमन्युभ्यां हैडिम्बस्य च रक्षस:।
विराटप्रभृतीनां च सुहृदामुपकारिणाम्॥ ४॥
द्रुपदद्रौपदेयानां द्रौपद्या सहितो ददौ।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने द्रौपदी को साथ ले जाकर आचार्य द्रोण, महामना कर्ण, धृष्टद्युम्न, अभिमन्यु, राक्षस घटोत्कच, विराट आदि अपने हितैषी द्रुपद तथा द्रौपदी कुमारों का श्राद्ध किया। 3-4 1/2॥
 
Yudhishthir took Draupadi along and performed Shraddha for Acharya Drona, Mahamana Karna, Dhrishtadyumna, Abhimanyu, Rakshas Ghatotkacha, Virat etc., his benefactors, Drupada and Draupadi Kumars. 3-4 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)