धृतराष्ट्रो ददौ राजा पुत्राणामौर्ध्वदेहिकम्।
सर्वकामगुणोपेतमन्नं गाश्च धनानि च॥ २॥
रत्नानि च विचित्राणि महार्हाणि महायशा:।
अनुवाद
महाबली राजा धृतराष्ट्र ने अपने पुत्रों के श्राद्ध में अन्न, गौएँ, धन और समस्त इच्छित गुणों से युक्त बहुमूल्य विचित्र रत्न दान किए॥2 1/2॥
The great king Dhritarashtra presented food, cows, wealth and precious strange gems with all the desirable qualities in the Shraddha of his sons. 2 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥