श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 42: राजा युधिष्ठिर तथा धृतराष्ट्रका युद्धमें मारे गये सगे-सम्बन्धियों तथा अन्य राजाओंके लिये श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 2-3h
 
 
श्लोक  12.42.2-3h 
धृतराष्ट्रो ददौ राजा पुत्राणामौर्ध्वदेहिकम्।
सर्वकामगुणोपेतमन्नं गाश्च धनानि च॥ २॥
रत्नानि च विचित्राणि महार्हाणि महायशा:।
 
 
अनुवाद
महाबली राजा धृतराष्ट्र ने अपने पुत्रों के श्राद्ध में अन्न, गौएँ, धन और समस्त इच्छित गुणों से युक्त बहुमूल्य विचित्र रत्न दान किए॥2 1/2॥
 
The great king Dhritarashtra presented food, cows, wealth and precious strange gems with all the desirable qualities in the Shraddha of his sons. 2 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)