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mahabharat 12.42.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन! तत्पश्चात उदारचित्त राजा युधिष्ठिर ने युद्ध में मारे गए समस्त जाति के लोगों, भाइयों और सम्बन्धियों का पृथक्-पृथक् श्राद्ध करवाया॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.42: राजा युधिष्ठिर तथा धृतराष्ट्रका युद्धमें मारे गये सगे-सम्बन्धियों तथा अन्य राजाओंके लिये श्राद्धकर्म करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 42: राजा युधिष्ठिर तथा धृतराष्ट्रका युद्धमें मारे गये सगे-सम्बन्धियों तथा अन्य राजाओंके लिये श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.42.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो युधिष्ठिरो राजा ज्ञातीनां ये हता युधि।
श्राद्धानि कारयामास तेषां पृथगुदारधी:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन! तत्पश्चात उदारचित्त राजा युधिष्ठिर ने युद्ध में मारे गए समस्त जाति के लोगों, भाइयों और सम्बन्धियों का पृथक्-पृथक् श्राद्ध करवाया॥1॥
 
Vaishampayanji says – King! Thereafter, the generous minded King Yudhishthir got Shraddha performed separately for all the people of caste, brothers and relatives who were killed in the war. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)