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mahabharat 12.41.4: महाराज धृतराष्ट्र मेरे पिता (चाचा) और सबसे बड़े देवता हैं। जो मुझे प्रसन्न करना चाहते हैं, उन्हें सदैव उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए और उनके कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.41: राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रके अधीन रहकर राज्यकी व्यवस्थाके लिये भाइयों तथा अन्य लोगोंको विभिन्न कार्योंपर नियुक्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.41.4 
धृतराष्ट्रो महाराज: पिता मे दैवतं परम्।
शासनेऽस्य प्रिये चैव स्थेयं मत्प्रियकांक्षिभि:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज धृतराष्ट्र मेरे पिता (चाचा) और सबसे बड़े देवता हैं। जो मुझे प्रसन्न करना चाहते हैं, उन्हें सदैव उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए और उनके कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।
 
‘Maharaj Dhritarashtra is my father (uncle) and the greatest god. Those who want to please me should always obey his orders and work for his welfare.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)