श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 40: युधिष्ठिरका राज्याभिषेक  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  12.40.22-23 
दिष्टॺा गाण्डीवधन्वा च भीमसेनश्च पाण्डव:।
त्वं चापि कुशली राजन् माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ॥ २२॥
मुक्ता वीरक्षयात् तस्मात् संग्रामाद् विजितद्विष:।
क्षिप्रमुत्तरकार्याणि कुरु सर्वाणि भारत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘गाण्डीवधारी अर्जुन, पाण्डवपुत्र भीमसेन, आप तथा माद्रीपुत्र नकुल और सहदेव- ये सब शत्रुओं को परास्त करके इस वीर-विनाशक युद्ध से सकुशल बच निकले हैं, इसे भी बड़े सौभाग्य की बात समझनी चाहिए। भरत! अब जो भी कार्य करने हों, उन्हें शीघ्रतापूर्वक पूरा करो।’॥ 22-23॥
 
‘Gandivadhari Arjun, Pandava's son Bhimasena, you and Madri's son Nakula and Sahadeva - all of them, after defeating the enemies, have safely escaped from this hero-destroying war, this too should be considered a matter of great good fortune. Bharata! Now whatever tasks are to be done, complete them quickly.'॥ 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)