धन्या त्वमसि पाञ्चालि या त्वं पुरुषसत्तमान्।
उपतिष्ठसि कल्याणि महर्षीनिव गौतमी॥ ५॥
तव कर्माण्यमोघानि व्रतचर्या च भाविनि।
अनुवाद
वह बोली - 'कल्याणी! पांचाल राजकुमारी! तुम धन्य हो, जो इन पाँचों महापुरुषों की सेवा में उसी प्रकार उपस्थित रहती हो, जैसे गौतमवंश में उत्पन्न जटिला अनेक महर्षियों की सेवा करती है। भाविनी! तुम्हारे सभी पुण्यकर्म अचूक हैं और तुम्हारे सभी व्रत सफल होते हैं। 5 1/2॥
She said – ‘Kalyani! Panchal princess! Blessed are you who remain present in the service of these five great men, just as Jatila, born in the Gautama dynasty, serves many great sages. Bhavini! All your virtuous deeds are infallible and all your fasting is successful. 5 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥