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स पपात विनिर्दग्धस्तेजसा ब्रह्मवादिनाम्।
महेन्द्राशनिनिर्दग्ध: पादपोऽङ्कुरवानिव॥ ३६॥
अनुवाद
ब्राह्मण मुनियों के तेज से दग्ध होकर वह राक्षस ऐसे गिर पड़ा, मानो इंद्र के वज्र से जलकर कोई नवोदित वृक्ष भूमि पर गिर पड़ा हो ॥36॥
Burnt by the brilliance of the brahminical saints, the demon fell down, as if a budding tree had fallen to the ground after being burnt by Indra's thunderbolt. 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥