श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  12.38.33-34 
ब्राह्मणा ऊचु:
एष दुर्योधनसखा चार्वाको नाम राक्षस:।
परिव्राजकरूपेण हितं तस्य चिकीर्षति॥ ३३॥
वयं ब्रूमो न धर्मात्मन् व्येतु ते भयमीदृशम्।
उपतिष्ठतु कल्याणं भवन्तं भ्रातृभि: सह॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने कहा, 'हे धर्मात्मा! यह दुर्योधन का मित्र चार्वाक नामक राक्षस है, जो साधु के वेश में यहाँ आया है और उसका कल्याण करना चाहता है। हम तुम्हें कुछ नहीं कहते। तुम्हारा यह भय दूर हो जाए। हम तुम्हें आशीर्वाद देते हैं कि तुम्हारा और तुम्हारे भाइयों का कल्याण हो।'
 
The Brahmin said, 'O righteous one! This is a demon named Charvaka, a friend of Duryodhan, who has come here in the guise of a hermit and wants to do good to him. We do not say anything to you. This kind of fear of yours should go away. We bless you that you and your brothers may attain welfare.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)