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mahabharat 12.38.31: वैशम्पायन जी बोले- महाराज! प्रजानाथ! यह सुनकर सभी ब्राह्मण बोले- महाराज! वह हमारी बात नहीं कह रहा है। हम यह आशीर्वाद दे रहे हैं कि आपका राज-धन सदैव बना रहे।   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.38.31 
वैशम्पायन उवाच
ततो राजन् ब्राह्मणास्ते सर्व एव विशाम्पते।
ऊचुर्नैतद् वचोऽस्माकं श्रीरस्तु तव पार्थिव॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी बोले- महाराज! प्रजानाथ! यह सुनकर सभी ब्राह्मण बोले- महाराज! वह हमारी बात नहीं कह रहा है। हम यह आशीर्वाद दे रहे हैं कि आपका राज-धन सदैव बना रहे।
 
Vaishmpayana ji said- King! Prajanath! On hearing this all the Brahmins said- Maharaj! He is not saying what we are saying. We are giving this blessing that may your royal wealth remain forever.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)