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mahabharat 12.38.21: नरेश्वर! तत्पश्चात वहाँ नरसिंगों और शंखों की सुन्दर ध्वनि सुनाई देने लगी, तथा लोगों के जयकारे की गम्भीर ध्वनि होने लगी॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.38.21 
ततो दुन्दुभिनिर्घोष: शंखानां च मनोरम:।
जयं प्रवदतां तत्र स्वन: प्रादुरभून्नृप॥ २१॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! तत्पश्चात वहाँ नरसिंगों और शंखों की सुन्दर ध्वनि सुनाई देने लगी, तथा लोगों के जयकारे की गम्भीर ध्वनि होने लगी॥21॥
 
Nareshwar! Thereafter, the beautiful sound of trumpets and conch shells began to be heard, the solemn sound of people cheering started appearing there. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)