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mahabharat 12.38.19: इसके बाद स्तुति की गम्भीर ध्वनि हुई, जिससे आकाश स्तब्ध हो गया। वह पवित्र शब्द कानों को सुखदायक और हृदय को प्रसन्न करने वाला था। 19॥   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.38.19 
तत: पुण्याहघोषोऽभूद् दिवं स्तब्ध्वेव भारत।
सुहृदां प्रीतिजनन: पुण्य: श्रुतिसुखावह:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद स्तुति की गम्भीर ध्वनि हुई, जिससे आकाश स्तब्ध हो गया। वह पवित्र शब्द कानों को सुखदायक और हृदय को प्रसन्न करने वाला था। 19॥
 
India After this, a solemn sound of praise started, which stunned the sky. That holy word was soothing to the ears and pleasing to the hearts. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)