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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध
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श्लोक 11
श्लोक
12.38.11
भव नस्त्वं महाराज राजेह शरदां शतम्।
प्रजा: पालय धर्मेण यथेन्द्रस्त्रिदिवं तथा॥ ११॥
अनुवाद
महाराज! आप सैकड़ों वर्षों तक हमारे राजा बने रहें। जैसे इन्द्र स्वर्ग की रक्षा करते हैं, वैसे ही आप भी अपनी प्रजा की धर्मपूर्वक रक्षा करें।॥11॥
‘Maharaj! May you remain our king for hundreds of years. Just as Indra protects the heaven, you too should protect your subjects righteously.'॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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