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mahabharat 12.38.10: हे शत्रुओं का नाश करने वाले राजन! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आप विजयी हुए। धर्म के बल और प्रभाव से आपने अपना राज्य पुनः प्राप्त कर लिया है - यह बड़े हर्ष की बात है॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.38.10 
दिष्टॺा जयसि राजेन्द्र शत्रून् शत्रुनिषूदन।
दिष्टॺा राज्यं पुन: प्राप्तं धर्मेण च बलेन च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले राजन! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आप विजयी हुए। धर्म के बल और प्रभाव से आपने अपना राज्य पुनः प्राप्त कर लिया है - यह बड़े हर्ष की बात है॥ 10॥
 
'O King, destroyer of enemies! It is a matter of great fortune that you are victorious. By the power and influence of Dharma, you have regained your kingdom - this is a matter of great joy.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)