श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.37.1 
युधिष्ठिर उवाच
श्रोतुमिच्छामि भगवन् विस्तरेण महामुने।
राजधर्मान् द्विजश्रेष्ठ चातुर्वर्ण्यस्य चाखिलान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे प्रभु! महामुने! द्विजश्रेष्ठ! मैं चारों वर्णों के धर्मों का तथा राजधर्म का भी विस्तृत वर्णन सुनना चाहता हूँ॥1॥
 
Yudhishthir said – Lord! Mahamune! Dwijshreshtha! I want to hear a detailed description of all the religions of the four varnas and also the royal religion. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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