श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.361.2 
तमतिक्रम्य नागेन्द्रो मतिमान् स नरेश्वर।
प्रोवाच मधुरं वाक्यं प्रकृत्या धर्मवत्सल:॥ २॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! उनके पास पहुँचकर धार्मिक स्वभाव वाले बुद्धिमान नागेन्द्र ने मधुर वाणी में कहा -
 
Nareshwar! Reaching near him, the intelligent Nagendra, who was religious by nature, said in a sweet voice -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)