श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.361.16 
तस्य मे प्रश्नमुत्पन्नं छिन्धि त्वमनिलाशन।
पश्चात् कार्यं वदिष्यामि श्रोतुमर्हति तद् भवान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पवनाशन! इस समय मेरे मन में एक नया प्रश्न उठा है। पहले इसका समाधान करो। उसके बाद मैं अपना कार्य तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत करूँगा और तुम कृपया उसे ध्यानपूर्वक सुनो॥16॥
 
Pavanashan! At this moment a new question has arisen in my mind. First solve this. After that I will present my work to you and you please listen to it carefully.॥ 16॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि उञ्छवृत्त्युपाख्याने एकषष्टॺधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३६१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें उञ्छवृत्तिका उपाख्यानविषयक तीन सौ इकसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)