श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.361.11 
सम्प्राप्तश्च भवानद्य कृतार्थ: प्रतियास्यति।
विस्रब्धो मां द्विजश्रेष्ठ विषये योक्तुमर्हसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! चूँकि तुम यहाँ तक आए हो, अतः पूर्ण होकर ही लौटोगे; अतः तुम निर्भय होकर मुझे अपने अभीष्ट कार्य की सिद्धि में लगाओ॥11॥
 
O best of Brahmins! Since you have come this far, you will return only after being fulfilled; therefore, without any fear, engage me in the accomplishment of your desired task. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)