Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.360.7: वे आपके दर्शन के अतिरिक्त अन्य किसी भी वस्तु को बाधा समझते हैं; अतः उन्हें उस बाधा का सामना नहीं करना चाहिए। कुलीन कुल में उत्पन्न होकर आपके समान कोई भी उत्तम गृहस्थ अतिथि की उपेक्षा करके घर में नहीं बैठता। ॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.360: पत्नीके धर्मयुक्त वचनोंसे नागराजके अभिमान एवं रोषका नाश और उनका ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हित्वा त्वद्दर्शनं किंचिद् विघ्नं न प्रतिपालयेत्।
तुल्योऽप्यभिजने जातो न कश्चित् पर्युपासते॥ ७॥
अनुवाद
वे आपके दर्शन के अतिरिक्त अन्य किसी भी वस्तु को बाधा समझते हैं; अतः उन्हें उस बाधा का सामना नहीं करना चाहिए। कुलीन कुल में उत्पन्न होकर आपके समान कोई भी उत्तम गृहस्थ अतिथि की उपेक्षा करके घर में नहीं बैठता। ॥7॥
They consider anything other than your darshan as an obstacle; hence, they should not face that obstacle. Born in a noble family, no good householder like you ignores a guest and sits in the house. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥