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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन
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श्लोक 34-35h
श्लोक
12.36.34-35h
देवानृषीन् मनुष्यांश्च पितॄन् गृह्याश्च देवता:॥ ३४॥
पूजयित्वा तत: पश्चाद् गृहस्थो भोक्तुमर्हति।
अनुवाद
गृहस्थ को चाहिए कि पहले देवताओं, ऋषियों, मनुष्यों (अतिथियों), पितरों तथा गृहदेवताओं का पूजन करके फिर भोजन ग्रहण करे।
A householder should first worship the gods, sages, human beings (guests), ancestors and the household deities and then take his meal. 34 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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