| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन » श्लोक 32-33h |
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| | | | श्लोक 12.36.32-33h  | पिष्टस्य चेक्षुशाकानां विकारा: पयसस्तथा॥ ३२॥
सक्तधानाकरम्भाणां नोपभोग्याश्चिरस्थिता:। | | | | | | अनुवाद | | ‘इसी प्रकार सड़े हुए या खराब आटे से बने खाद्य पदार्थ, गन्ने का रस, सब्जी या दूध, सत्तू, भुने हुए जौ और दही मिला हुआ सत्तू, यदि बहुत समय बाद बनाया गया हो, तो भी नहीं खाना चाहिए।॥32 1/2॥ | | | | ‘Similarly, the foodstuffs made by spoiling or rotting flour, sugarcane juice, vegetables or milk, Sattu, roasted barley and Sattu mixed with curd, if prepared after a long time, should not be eaten.॥ 32 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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