श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.36.25 
एडकाश्वखरोष्ट्रीणां सूतिकानां गवामपि।
मानुषीणां मृगीणां च न पिबेद् ब्राह्मण: पय:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘ब्राह्मण को भेड़, घोड़ी, गधी, ऊँटनी, दस दिन के भीतर बच्चा देने वाली गाय, स्त्री और हिरणी का दूध नहीं पीना चाहिए।॥25॥
 
‘A Brahmin should not drink the milk of a sheep, a mare, a donkey, a camel, a cow that has given birth within ten days, a human woman or a deer.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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