| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन » श्लोक 23-24 |
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| | | | श्लोक 12.36.23-24  | भासा हंसा: सुपर्णाश्च चक्रवाका: प्लवा बका:।
काको मद्गुश्च गृध्रश्च श्येनोलूकस्तथैव च॥ २३॥
क्रव्यादा दंष्ट्रिण: सर्वे चतुष्पात् पक्षिणश्च ये।
येषां चोभयतो दन्ताश्चतुर्दंष्ट्राश्च सर्वश:॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | भास, हंस, गरुड़, चक्रवाक, बत्तख, बगुले, कौए, मृग, गिद्ध, बाज, उल्लू, कच्चा मांस खाने वाले दाढ़ वाले सभी मांसाहारी पशु, सभी चौपाये जीव और पक्षी, तथा दोनों ओर के दांत और चार दाढ़ वाले सभी जीव अभक्ष्य हैं॥ 23-24॥ | | | | ‘Bhasa, swans, eagles, chakravakas, ducks, herons, crows, madgus*, vultures, hawks, owls, all carnivorous animals with molars that eat raw meat, all four-legged creatures and birds, as well as all creatures having teeth on both sides and four molars are inedible.॥ 23-24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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