श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.36.2 
व्यास उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
सिद्धानां चैव संवादं मनोश्चैव प्रजापते:॥ २॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी बोले - 'हे राजन! इस विषय में लोग प्रजापति मनु और सिद्धपुरुषों के संवाद रूपी इस प्राचीन कथा का उदाहरण देते हैं।॥ 2॥
 
Vyasa said, 'O King! In this matter people give the example of this ancient story in the form of a dialogue between Prajapati Manu and the Siddha Purushas.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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