श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.36.1 
युधिष्ठिर उवाच
किं भक्ष्यं चाप्यभक्ष्यं च किं च देयं प्रशस्यते।
किं च पात्रमपात्रं वा तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! क्या खाने योग्य है और क्या अखाद्य? दान करने के लिए क्या उत्तम माना गया है? कौन दान के योग्य है और कौन नहीं? कृपया मुझे यह सब बताइये।"
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! What is edible and what is inedible? What is considered the best thing to donate? Who is eligible and who is not eligible for donation? Please tell me all this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)