श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 359: नागराजका घर लौटना, पत्नीके साथ उनकी धर्मविषयक बातचीत तथा पत्नीका उनसे ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये अनुरोध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.359.16 
एतच्छ्रुत्वा महाप्राज्ञ तत्र गन्तुं त्वमर्हसि।
दातुमर्हसि वा तस्य दर्शनं दर्शनश्रव:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि नागराज! मेरे वचन सुनकर अब तुम्हें वहाँ जाकर ब्राह्मणदेवता का दर्शन करना चाहिए॥16॥
 
O great sage Nagaraj! Having heard my words you should now go there and offer your darshan to the Brahmin-god.॥ 16॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि उञ्छवृत्त्युपाख्याने एकोनषष्टॺधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें उञ्छवृत्तिका उपाख्यानविषयक तीन सौ उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)