हे महामुनि नागराज! मेरे वचन सुनकर अब तुम्हें वहाँ जाकर ब्राह्मणदेवता का दर्शन करना चाहिए॥16॥
O great sage Nagaraj! Having heard my words you should now go there and offer your darshan to the Brahmin-god.॥ 16॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि उञ्छवृत्त्युपाख्याने एकोनषष्टॺधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें उञ्छवृत्तिका उपाख्यानविषयक तीन सौ उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥