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mahabharat 12.358.8: इस वन में रहते हुए तुमने अन्न त्याग दिया है। इससे हमारे धर्म में बाधा आ रही है। इससे बालकों से लेकर वृद्धों तक हम सभी को बहुत कष्ट हो रहा है। ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.358: नागराजके दर्शनके लिये ब्राह्मणकी तपस्या तथा नागराजके परिवारवालोंका भोजनके लिये ब्राह्मणसे आग्रह करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 358: नागराजके दर्शनके लिये ब्राह्मणकी तपस्या तथा नागराजके परिवारवालोंका भोजनके लिये ब्राह्मणसे आग्रह करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.358.8 
त्यक्ताहारेण भवता वने निवसता त्वया।
बालवृद्धमिदं सर्वं पीडॺते धर्मसंकटात्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इस वन में रहते हुए तुमने अन्न त्याग दिया है। इससे हमारे धर्म में बाधा आ रही है। इससे बालकों से लेकर वृद्धों तक हम सभी को बहुत कष्ट हो रहा है। ॥8॥
 
While living in this forest you have given up eating. This is creating obstacles in our Dharma. From children to the elderly all of us are suffering a lot because of this. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)